Mon, October 05, 2026 - Sun, October 11, 2026

साप्ताहिक राशिफल

चंद्र राशि के अनुसार शनि के बारहवें भाव में स्थित होने के कारण यूं तो इस सप्ताह आप पूरे समय चुस्ती-फुर्ती से भरे रहेंगे, लेकिन फिर भी आपको अपने भोजन पर ध्यान देना होगा। ऐसे में बासी और गरिष्ठ भोजन से बचकर रहें और भूलकर भी अपना भोजन मिस ना करें। साथ ही जितना संभव हो, बीच-बीच में फल का सेवन करते रहें। इस सप्ताह आपको हर प्रकार के अपने निवेश और उससे जुड़ी तमाम भविष्य की योजनाओं को, गुप्त रखने की सबसे अधिक ज़रूरत होगी। अन्यथा आपकी इन योजनाओं से कोई आपका करीब, अपना फ़ायदा उठाते हुए आपको धन हानि दे सकता है। रिश्तेदारों के साथ अपने संबंधों को फिर तरोताज़ा करने में, इस सप्ताह आपको विशेष सफलता मिलेगी। साथ ही ये समय घरेलू मामलों और काफ़ी समय से लंबित पड़े घर के काम-काज के लिए भी, अच्छा सप्ताह सिद्ध होगा। इस सप्ताह आपको सबसे अधिक, अपनी भावनाओं को काबू में रखने की हिदायत दी जाती है। चंद्र राशि के अनुसार केतु के चौथे भाव में स्थित होने के कारण संभव है कि इस सप्ताह आपके अंदर विलासिता की वृद्धि हो, जिसके कारण आप अपने करियर के प्रति, कुछ लापरवाह दिखाई देंगे। इस राशि के छात्रों को इस सप्ताह शिक्षा के क्षेत्र में, लंबे समय के बाद मनचाहे परिणाम मिल सकते हैं। क्योंकि सप्ताह की शुरुआत भले ही आपसे कुछ अतिरिक्त मेहनत कराए, परंतु सप्ताह के अंत तक आप कई शुभ व अनुकूल फल प्राप्त करने में सफल होंगे। इसलिए नकारात्मक विचारों से दूर रहते हुए, अच्छे समय का इंतज़ार करें और अपनी मेहनत जारी रखें।

साप्ताहिक प्रेम राशिफल

इस सप्ताह आपको प्रेम-संबंधों में, अपने स्वतंत्र विवेक का इस्तेमाल करने की ज़रूरत होगी। क्योंकि ऐसा करके ही आप अपने प्रेमी के साथ चल रहे अपने हर विवाद को खत्म कर, अपने रिश्ते को आगे बढ़ा सकेंगे। इसके लिए अपने काम से कुछ समय निकलते हुए, उसे अपने प्रेमी के साथ व्यतीत करें और रिश्ते में आ रही हर गलतफहमी को दूर करने का प्रयास करें। इस सप्ताह आपके जीवन में कई ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जब आप अपने साथ केवल जीवनसाथी को ही खड़ा पाएंगे। क्योंकि इस समय आपका जीवनसाथी किसी फ़रिश्ते की तरह, हर कदम पर आपका बहुत ध्यान रखेगा। साथ ही आपको इस दौरान उनसे भरपूर सहयोग की प्राप्ति भी हो सकेगी, जिसका सकारात्मक असर आपके वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने का कार्य करेगा।उपाय: “ॐ भौमाय नमः” का प्रतिदिन 27 बार जप करें।